मेरी बात सुन पगली ~ Meri baat sun pagli

मेरी बात सुन पगली अकेले हम ही शामिल नही है इस जुर्म में.... जब_नजरे मिली थी तो मुस्कराई_तू भी थी.

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यहां आ जाने के बाद वापसी की उम्मीदें भी दफ़न हो जाती हैं.

यहां की वादियां दिन में जितनी शांत रहती हैं, रात में उतना ही चीखती हैं.